Alankar

Alankar Kise Kahate Hain: परिभाषा, भेद और उदाहरण सहित पूरी जानकारी

हिंदी साहित्य और व्याकरण में अलंकार (Alankar) का महत्वपूर्ण स्थान है। जिस प्रकार आभूषण किसी व्यक्ति की सुंदरता को बढ़ाते हैं, उसी प्रकार अलंकार भाषा और साहित्य की शोभा बढ़ाते हैं। कविता, कहानी, भाषण और निबंध को अधिक प्रभावशाली, आकर्षक और भावपूर्ण बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है।

यदि आप छात्र हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या हिंदी व्याकरण सीखना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है। इस लेख में हम अलंकार क्या है, अलंकार की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण, पहचान, उपयोग तथा परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में समझेंगे।

अलंकार का अर्थ – Alankar ka Arth

‘अलंकार’ शब्द संस्कृत भाषा के ‘अलम्’ और ‘कार’ शब्दों से मिलकर बना है।

  • अलम् का अर्थ है – सुंदर या शोभायुक्त।
  • कार का अर्थ है – करने वाला।

अर्थात जो भाषा, कविता या साहित्य को सुंदर और प्रभावशाली बनाए, उसे अलंकार कहा जाता है।

Alankar Ki Paribhasha – अलंकार की परिभाषा

परिभाषा:- जब किसी कविता, वाक्य या साहित्यिक रचना की सुंदरता, प्रभाव और भावों की अभिव्यक्ति बढ़ाने के लिए विशेष शब्दों या अर्थों का प्रयोग किया जाता है, तो उसे अलंकार कहते हैं।

सरल शब्दों में:- जो भाषा को आकर्षक, मधुर और प्रभावशाली बनाए, वही अलंकार है।

अलंकार किसे कहते हैं? – Alankar Kise Kahate Hain

अलंकार हिंदी व्याकरण और साहित्य का वह तत्व है जो भाषा, कविता या गद्य की सुंदरता, प्रभाव और अभिव्यक्ति को बढ़ाता है। जिस प्रकार आभूषण किसी व्यक्ति की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार अलंकार शब्दों और भावों को अधिक आकर्षक तथा प्रभावशाली बनाते हैं। 

Alankar Ki Visheshtayen – अलंकार की विशेषताएँ

अलंकार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • भाषा को सुंदर और आकर्षक बनाता है।
  • कविता में सौंदर्य और मधुरता लाता है।
  • भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है।
  • पाठक या श्रोता पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।
  • साहित्य को रोचक और यादगार बनाता है।

अलंकार कितने प्रकार के होते हैं? – Alankar Kitne Prakar Ke Hote Hain

हिंदी व्याकरण में अलंकार के दो प्रकार होते है। जिसके बारे में नीचे लिखा है।

  1. शब्दालंकार
  2. अर्थालंकार

इन दोनों के अंतर्गत कई उपप्रकार आते हैं।

शब्दालंकार क्या है? – Shabdalankar Kise Kahate Hain

शब्दालंकार वह अलंकार है जिसमें शब्दों की विशेष व्यवस्था, पुनरावृत्ति या ध्वनि-सौंदर्य से काव्य की शोभा बढ़ती है। इसमें चमत्कार शब्दों के कारण उत्पन्न होता है, न कि अर्थ के कारण।

परिभाषा:- जब किसी कविता या वाक्य में शब्दों के विशेष प्रयोग से भाषा सुंदर, मधुर और प्रभावशाली बनती है, तो उसे शब्दालंकार कहते हैं।

Shabdalankar Ke Bhed – शब्दालंकार के प्रमुख प्रकार

यहाँ नीचे हमने शब्दालंकार के कुछ प्रमुख प्रकारों के बारे में बात की है।

1. अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar)

जब किसी वाक्य या पंक्ति में एक ही वर्ण या ध्वनि की बार-बार आवृत्ति होती है, तब अनुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • चारु चंद्र की चंचल किरणें।
  • कल कल करती कल्याणी नदी।

पहचान:


यदि एक जैसी ध्वनि बार-बार सुनाई दे, तो अनुप्रास अलंकार होता है।

2. यमक अलंकार (Yamak Alankar)

जब एक ही शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार अलग-अलग अर्थों में किया जाए, तो उसे यमक अलंकार कहते हैं।

उदाहरण:

  • कनक कनक ते सौ गुनी।

पहला कनक = सोना
दूसरा कनक = धतूरा

3. श्लेष अलंकार (Shlesh Alankar)

जब एक ही शब्द से एक साथ दो या अधिक अर्थ निकलते हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • पंकज।

यहाँ पंकज का अर्थ कमल भी है और पंक (कीचड़) से उत्पन्न भी।

4. पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार (Punarkti Prakash Alankar)

जब किसी शब्द की पुनरावृत्ति केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए की जाती है, तब पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • धीरे-धीरे चलो।
  • दूर-दूर तक हरियाली है।

अर्थालंकार क्या है? – Arthaalankar Kise Kahate Hain

अर्थालंकार वह अलंकार है जिसमें शब्दों के बजाय उनके अर्थ से काव्य की सुंदरता और प्रभाव बढ़ता है। यदि किसी वाक्य के शब्द बदल दिए जाएँ, लेकिन उसका अर्थ और सौंदर्य बना रहे, तो वहाँ अर्थालंकार होता है।

परिभाषा:- जब किसी वाक्य या काव्य में शब्दों के अर्थ, भाव, तुलना, कल्पना या विशेष अभिव्यक्ति से सौंदर्य उत्पन्न होता है, तो उसे अर्थालंकार कहते हैं।

Arthalankar Ke Bhed – अर्थालंकार के प्रमुख प्रकार

अर्थालंकार के 5 भेद होते है, जिसके बारें में हमने नीचे विस्तार से बात की है।

1. उपमा अलंकार (Upma Alankar)

जब दो वस्तुओं की तुलना जैसे, समान, सा, सी, मानो आदि शब्दों द्वारा की जाती है, तब उपमा अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • उसका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।
  • वह शेर की तरह बहादुर है।

पहचान:


यदि तुलना करने वाले शब्द दिखाई दें, तो उपमा अलंकार होता है।

2. रूपक अलंकार (Rupak Alankar)

जब उपमेय को सीधे उपमान ही मान लिया जाए, तब रूपक अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • वह भारत का शेर है।
  • जीवन एक संघर्ष है।

पहचान:

सीधी समानता दिखाई जाए।

3. अतिशयोक्ति अलंकार (Atishayokti Alankar)

जब किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, तब अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • उसकी आवाज़ पूरे संसार में गूँज गई।
  • आँसुओं की नदी बह गई।

4. मानवीकरण अलंकार (Manvikaran Alankar)

जब निर्जीव वस्तुओं को मनुष्य की तरह प्रस्तुत किया जाए, तब मानवीकरण अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • सूरज मुस्कुरा रहा है।
  • हवा गुनगुना रही है।

5. उत्प्रेक्षा अलंकार (Utpreksha Alankar)

जब किसी वस्तु की संभावना या कल्पना व्यक्त की जाए, तब उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उदाहरण:

  • मानो आकाश में मोती बिखर गए हों।

शब्दालंकार और अर्थालंकार में अंतर

आधारशब्दालंकारअर्थालंकार
आधारशब्दअर्थ
प्रभावशब्दों की सुंदरताभावों की सुंदरता
पहचानशब्द बदलने से प्रभाव समाप्तअर्थ बदलने से प्रभाव समाप्त
उदाहरणअनुप्रास, यमकउपमा, रूपक

अलंकार की पहचान कैसे करें?

अलंकार (Alankar) पहचानने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें—

  • यदि एक जैसी ध्वनि बार-बार आए → अनुप्रास
  • यदि तुलना हो → उपमा
  • यदि सीधे समान घोषित किया जाए → रूपक
  • यदि बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए → अतिशयोक्ति
  • यदि निर्जीव वस्तु को जीवित बताया जाए → मानवीकरण
  • यदि एक शब्द के दो अर्थ हों → श्लेष
  • यदि एक शब्द अलग-अलग अर्थों में दोहराया जाए → यमक

इन संकेतों को याद रखने से किसी भी परीक्षा में अलंकार पहचानना आसान हो जाता है।

अलंकार के उदाहरण – Alankar Ke Udaharan

नीचे दिए गए उदाहरणों के माध्यम से अलंकार को आसानी से समझे।

वाक्यअलंकार
चारु चंद्र की चंचल किरणेंअनुप्रास
वह शेर हैरूपक
वह शेर की तरह बहादुर हैउपमा
सूरज मुस्कुरा रहा हैमानवीकरण
आँसुओं की नदी बह गईअतिशयोक्ति
कनक कनक ते सौ गुनीयमक
धीरे-धीरे चलोपुनरुक्ति प्रकाश
मानो फूल बरस रहे होंउत्प्रेक्षा

अलंकार का महत्व

हिंदी साहित्य में अलंकार का विशेष महत्व है। इसके बिना भाषा सामान्य और साधारण प्रतीत होती है। अलंकार—

  • कविता को आकर्षक बनाते हैं।
  • कहानी में रोचकता लाते हैं।
  • भाषण को प्रभावशाली बनाते हैं।
  • लेखन को सुंदर और यादगार बनाते हैं।
  • भावों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सहायता करते हैं।
  • पाठक की रुचि बनाए रखते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में अलंकार का महत्व

अलंकार से संबंधित प्रश्न अनेक परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, जैसे—

  • CTET
  • UPTET
  • REET
  • DSSSB
  • TGT
  • PGT
  • SSC
  • UPSC
  • राज्य लोक सेवा आयोग
  • विद्यालय एवं विश्वविद्यालय परीक्षाएँ

इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को प्रमुख अलंकारों की परिभाषा, पहचान और उदाहरण अवश्य याद रखने चाहिए।

अलंकार याद करने की आसान ट्रिक

  • उपमा → जैसे, समान, सा, सी
  • रूपक → सीधी समानता
  • अनुप्रास → एक जैसी ध्वनि
  • यमक → एक शब्द, अलग-अलग अर्थों में बार-बार
  • श्लेष → एक शब्द, अनेक अर्थ
  • मानवीकरण → निर्जीव वस्तु को मनुष्य बनाना
  • अतिशयोक्ति → बढ़ा-चढ़ाकर कहना

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अलंकार क्या है?

भाषा और साहित्य की सुंदरता बढ़ाने वाले शब्दों या अर्थों के विशेष प्रयोग को अलंकार कहते हैं।

अलंकार कितने प्रकार के होते हैं?

मुख्य रूप से दो प्रकार के—शब्दालंकार और अर्थालंकार।

शब्दालंकार क्या है?

जिसमें शब्दों के विशेष प्रयोग से सौंदर्य उत्पन्न हो, उसे शब्दालंकार कहते हैं।

अर्थालंकार क्या है?

जिसमें अर्थ की विशेषता से भाषा सुंदर बने, उसे अर्थालंकार कहते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण अलंकार कौन-कौन से हैं?

उपमा, रूपक, अनुप्रास, यमक, श्लेष, मानवीकरण, अतिशयोक्ति और उत्प्रेक्षा।

अलंकार की पहचान कैसे करें?

तुलना, ध्वनि की पुनरावृत्ति, बढ़ा-चढ़ाकर कथन, एक शब्द के अनेक अर्थ तथा निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण जैसे संकेतों से अलंकार पहचाने जा सकते हैं

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